क्या वाकई रोबोटिक सर्जरी डॉक्टरों द्वारा की जाती है या फिर रोबोटों के द्वारा? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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    Robotic surgical system used by doctors at Kalyan Hospital.

    आज के समय में हर कोई घुटनों और कूल्हों के जोड़ों से जुड़ी समस्या का सामना कर रहा है। समस्या बड़ी होने पर और इस समस्या का इलाज करने के लिए डॉक्टर सभी जांचों के बाद ही रोबोटिक सर्जरी का फैसला करते हैं। यह फैसला केवल अकेले डॉक्टर या फिर मरीज का नहीं होता है। दरअसल, यह फैसला समस्या की स्थिति के हिसाब से दोनों की तरह से लिए जाता है, जिसमें की सर्जरी के दौरान डॉक्टरों को मरीज का पूरा -पूरा साथ मिल सके। कूल्हों के जोड़ों से जुड़ी समस्या में लोग गंभीर रूप से प्रभावित हो जाते हैं, जिस में कि सर्जरी का फैसला करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, अब इस तरह की स्थिति में कई लोग जानना चाहते हैं, कि आखिर क्या होती है यह रोबोटिक सर्जरी और क्या यह सर्जरी केवल डॉक्टर द्वारा कि जाती है, या फिर केवल रोबोट के द्वारा कि जाती है? 

    दरअसल, इस पर जवाब देते हुए डॉक्टर का कहना है, कि रोबोटिक जॉइंट सर्जरी एक इस तरह की सर्जरी होती है, जिसमें एक पीड़ित व्यक्ति का घुटनों के गंभीर आर्थराइटिस या फिर घुटनों में होने वाले गंभीर दर्द में डॉक्टरों की मदद से रोबोट के माध्यम से इलाज किया जाता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इस तरह की सर्जरी में सभी डॉक्टर्स रोबोटिक सिस्टम का बखूबी इस्तेमाल करके पीड़ित व्यक्ति के शरीर में छोटे-छोटे चीरे लगाते हैं और एक ऑपरेशन को अंजाम देते हैं। इसमें एक कैमरा आर्म और मैकेनिकल आर्म शामिल होते हैं, जिसमें सर्जिकल उपकरण की मौजूदगी शामिल होती है। 

    दरअसल, हम में से ज्यादातर लोग इस बात से अनजान होते हैं, कि इस प्रक्रिया में भी घुटनों के पारंपरिक रिप्लेसमेंट की तरह ही ऑर्थोपीडिक सर्जन घुटने के समस्या से प्रभावित हिस्से को हटा देते हैं और उसी जगह पर इंप्लांट लगा देते हैं। दरअसल, इस तरह करने पर इस दौरान मरीज को दर्द कम होता है और घुटनों की ताकत, मोबिलिटी और बैलेंस दुबारा से वापिस आ जाता है। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में ऑस्टियोपोरोसिस या फिर आर्थ्रायटिस जैसी समस्या से प्रभावित कूल्हों के जोड़ों को भी रोबोटिक असिस्टेड के माध्यम से सर्जरी द्वारा बदले जा सकते हैं।

    हालांकि, रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी इनोवेशन के साथ-साथ सटीकता भी प्रदान करती है, पर इसके बारे में बहुत सी गलतफहमियां और मिथक भी लोगों में फैले हुए हैं, जिनकी वजह से लोग इस सर्जरी से काफी ज्यादा डरने लग जाते हैं। आम तौर पर, लोग इन फैली हुई मिथकों से इतने ज्यादा प्रभावित हो जाते हैं, कि वह एक दम से या फिर जल्दी से रोबोटिक सर्जरी कराने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हो पाते हैं। इन्हीं गलतफहमियों को दूर करने के लिए और रोबोटिक सर्जरी से जुड़ी कुछ और जानकारी प्राप्त करने के लिए आइये डॉक्टर से इसके बारे में और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

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    मिथक 1: यह पूरी सर्जरी रोबोट के माध्यम से की जाती है? 

    सच्चाई: दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि यह सर्जरी पूरी तरीके से रोबोट के माध्यम से नहीं की जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान एक रोबोटिक आर्म की सहायता से सर्जन इंप्लांट को अपनी सही जगह पर स्थापित करता है। ऐसे में, सबसे पहले सर्जन सही जगह पर चीरे लगाते हैं और फिर इस रोबोटिक आर्म की सहायता से इंप्लांट को अपनी सही जगह पर फिट करते हैं। सर्जरी के दौरान जब रोबोटिक आर्म हिलती है, या फिर कोई गति करती हैं, तो इस से पहले वहां मौजूद सर्जन उसे कंट्रोल करते हैं, मतलब कि उसे कमांड प्रदान करते हैं। जिससे कि वह अपने काम को शुरू करती है। इसलिए, इस रोबोटिक सर्जरी को बिना सर्जन की मदद के बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता है। आम तौर पर, लोगों में फैली यह बात कि सर्जरी सिर्फ रोबोट के माध्यम से की जाती है, यह साफ़ गलत है। 

    मिथक 2: रोबोटिक सर्जरी में काफी ज्यादा जोखिम होता है?

    सच्चाई: आम तौर पर,लोगों में फैली यह बात, कि रोबोटिक सर्जरी में आम सर्जरी के मुकाबले काफी ज्यादा खतरा होता है, तो यह सिर्फ एक गलतफहमी है, जो केवल लोगों को गुमराह करती है। वास्तव में, ऐसा कुछ भी नहीं है, बल्कि इस में इतना खतरा नहीं होता है। आम तौर पर, रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बहुत से फायदे होते हैं, जिस में ज्यादा सटीकता होना, कम चीरे लगाने की जरूरत होना और सेहत को जल्दी लाभ मिलना जैसे कई फायदे शामिल हो सकते हैं। आम तौर पर, केवल टेक्नोलॉजी की सहायता से सर्जन हर मरीज की शारीरिक संरचना के आधार पर ही सर्जरी को एक बेहतर तरीके से कर पाते हैं। दरअसल, इससे जटिलताओं का जोखिम काफी ज्यादा कम हो जाता है और सर्जरी बिल्कुल आराम से हो जाती है। 

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    मिथक 3: रोबोटिक सर्जरी सिर्फ सरल प्रक्रियाओं के लिए ही होती है? 

    सच्चाई: आम तौर पर, ऐसे में बहुत से लोगों का मानना है, कि रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी कोप सिर्फ सरल और आम प्रक्रियाओं में ही किया जाता है। पर, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, इस सर्जरी को रिप्लेसमेंट, स्पाइन की सर्जरी और फ्रैक्चर जैसी गंभीर समस्याओं को ठीक करने जैसी जटिल ऑर्थोपीडिक प्रक्रियाओं के लिए भी रोबोटिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बखूबी किया जाता है। आम तौर पर, रोबोटिक सिस्टम खतरनाक प्रक्रियाओं के लिए काफी ज्यादा उपयोगी साबित होते हैं, क्योंकि यह सटीकता और अनुकूलन होती हैं। दरअसल, इसमें अत्यधिक सटीकता की काफी ज्यादा जरूरत होती है।

    मिथक 4: रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी होने के बाद स्वस्थ होने में काफी ज्यादा समय लगता है? 

    सच्चाई: आम तौर पर, लोगों में इस तरह की बातें काफी ज्यादा फैली हुई है, कि यह सर्जरी काफी ज्यादा जोखिम भरी होती है और रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी होने के बाद स्वस्थ होने में काफी ज्यादा समय लगता है। पर, आपको बता दें कि यह केवल एक गलतफहमी है, जो लोगों में फैली हुई है। पर, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी के दौरान सर्जन द्वारा अक्सर ही छोटे चीरों को लगाया जाता है, जिसके कारण ही इस के आस पास के ऊतकों को काफी ज्यादा कम या फिर न के बराबर नुकसान पहुंचता है। इससे व्यक्ति को जल्दी ठीक होने में काफी ज्यादा सहायता प्राप्त होती है। ऐसे में, वो अपने रोजाना के कामों को भी जल्दी शुरू कर सकता है। ऐसा तभी होता है, जब सर्जरी के दौरान इंप्लांट की ज्यादा सटीक स्थापना की जाती है। 

    निष्कर्ष: रोबोटिक जॉइंट सर्जरी पूरी तरीके से रोबोट के माध्यम से नहीं की जाती, बल्कि इस प्रक्रिया के दौरान एक रोबोटिक आर्म की सहायता से सर्जन इंप्लांट को अपनी सही जगह पर स्थापित करता है। और सर्जरी को अंजाम देता है। बिना सर्जन की मदद के इस रोबोटिक सर्जरी को बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा, रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी के साथ- साथ मेडिकल टेक्नोलॉजी में भी काफी ज्यादा विकास हुआ है। रोबोटिक सर्जरी कई तरह के फायदे प्रदान करती है, मुकाबले पारंपरिक सर्जरी के। इस लेख के माध्यम से रोबोटिक सर्जरी के बारे में फैली मिथकों की सच्चाई बताई गई है। किसी भी बात का विश्वास करने से पहले उसके बारे में आप पहले खुद जानकारी प्राप्त करें, उसके बाद ही कुछ रॉय बनाएं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और जोड़ों से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही कल्याण हस्पताल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। 

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    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

    प्रश्न 1. रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी के क्या -क्या फायदे होते हैं? 

    दरअसल, रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी से पीड़ित व्यक्ति को कई फायदे प्रपात हो सकते हैं, जिसमें सर्जरी की उच्च सटीकता होना, खून का कम नुक्सान होना, बेहतर और प्राकृतिक परिणाम मिलना, इम्प्लांट की लंबी उम्र होना और अस्पताल में कम समय रुकने का लाभ होना जैसे कई फायदे हो सकते हैं। 

    प्रश्न 2. रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी दर्दनाक होती है?

    दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले बहुत ही ज्यादा कम दर्दनाक साबित होती है।

    प्रश्न 3. क्या हर कोई इस रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी को करवा सकता है? 

    आम तौर पर, रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी असल में उन लोगों के लिए होती है, जो विशेष रूप से गठिया या फिर किसी खतरनाक जोड़ों की बीमारी से पीड़ित होते हैं। इसलिए, यह हर किसी के लिए अनिवार्य नहीं होती है। और ऐसे में आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इस सर्जरी का फैसला आपके खुद का नहीं होता है, दरअसल इस सर्जरी का आखिरी फैसला डॉक्टर की सभी जांच के बाद किया तय किया जाता है। 

    प्रश्न 4. रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी में किन चीजों का अधिक इस्तेमाल होता है?

    आम तौर पर, रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी के दौरान विशेष तौर पर अत्याधुनिक तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें रोबोटिक आर्म, 3D इमेजिंग और प्लानिंग सॉफ्टवेयर, सर्जन कंसोल और नेविगेशन सिस्टम शामिल होता है। 

    प्रश्न 5. घुटने की समस्या किन लोगों को अधिक प्रभावित करती है?

    आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि विशेष तौर पर घुटनों की समस्या उन लोगों को अधिक प्रभावित करती है, जो 50 साल से ज्यादा उम्र के होते हैं। इसके इलावा, यह महिलाओं, अधिक मोटापे से पीड़ित लोगों, एथलीटों और गठिया जैसी समस्या से पीड़ित लोगों को भी प्रभावित करती है।