ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी क्या है? डॉक्टर से जानें ऑस्टियोपोरोसिस के लिए कौन सा टेस्ट जरूरी होता है?

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    Pain relief knee therapy at Kalyan Hospital for effective orthopedic treatment.

    दरअसल, इसमें किसी भी तरह का कोई शक नहीं है, कि आज के समय में लोगों को सेहत से जुड़ी कई तरह कि समस्यायों का सामना करना पड़ रहा है। आम तौर पर, आज के समय में न केवल बुजुर्गों को बल्कि युवाओं को भी हड्डियों से जुड़ी तरह-तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। आपकी जानकारी के लिये आपको बता दें, कि जहां 50 और 55 की उम्र के बाद लोग शरीर की हड्डियां कमजोर होने की शिकायत करते थे, पर वहीं आज लगभग 25 की उम्र के बाद ज्यादातर लोग हाथ -पैरों और शरीर के दूसरे अंगों की हड्डियां कमजोर और काफी ज्यादा दर्द होने की शिकायत करने लगें हैं। लोगों का खराब खानपान, रात भर स्क्रीन पर काम करते रहना, नींद पूरी न करना, तनाव में रहना और जीवनशैली की गलत आदतों को अपनाने के कारण ज्यादातर लोगों को इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 

    इसके अलावा, लोगों की उम्र बढ़ने के साथ -साथ शरीर की हड्डयों में कैल्शियम और मिनरल्स की मात्रा काफी ज्यादा कम होने लगती है, जिसकी वजह से लोगों की हड्डियां काफी ज्यादा कमजोर और दर्द करने लग जाती हैं। आम तौर पर, यह हड्डियां कमजोर होकर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी का रूप धारण कर सकती हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि ऑस्टियोपोरोसिस एक इस तरह की स्थिति होती है, जिसमें एक व्यक्ति के शरीर की हड्डियां इतनी ज्यादा कमजोर हो जाती है, कि किसी भी समय कोई भी मामूली चोट लगने पर, या फिर कहीं भी गिरने पर हड्डियां टूट सकती है और डैमेज हो सकती हैं। 

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    ऐसे में लोग ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी को गहराई से जानना चाहते हैं, कि यह क्या है और इस तरह की समस्या की पहचान करने के लिए कौन सा टेस्ट किया जा सकता है? दरअसल, ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिस को अक्सर साइलेंट डिजीज कहा जाता है। इसमें पीड़ित व्यक्ति की हड्डियां काफी ज्यादा कमजोर, पतली और छिद्रों से भर जाती हैं, जिसकी वजह से वो कोई भी दुर्घटना होने पर आसानी से जुट जाती हैं। इसके अलावा, इस तरह की समस्या में कोई भी आम गतिविधि करने, जैसे खांसने या फिर झुकने पर भी हड्डी फ्रैक्चर हो जाती है। इस समस्या के शुरुआती लक्षण साफ़ नज़र नहीं आते हैं। आम तौर पर, इसमें जब तक हड्डी टूट न जाए, तब तक समस्या का अच्छे तरीके से पता नहीं चलता है। इस तरह की समस्या की पहचान करने के लिए बोन डेंसिटी टेस्ट काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस टेस्ट से वक्त रहते समस्या की पहचान करने में काफी मदद प्राप्त होती है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं 

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    बोन डेंसिटी टेस्ट क्या होता है? 

    दरअसल, बोन डेंसिटी टेस्ट ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी की पहचान करने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करता है। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि यह एक विशेष एक्स-रे जांच होती है, जिसको डुअल एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्प्शनोमेट्री के नाम से जाना जाता है। दरअसल, इस टेस्ट से न केवल हड्डियों में मौजूद कैल्शियम और मिनरल्स की जांच की जाती है, बल्कि हड्डियों की मजबूती और ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम का भी पता लगाया जाता है। यह पूरी तरीके से सुरक्षित और दर्द रहित होता है, क्योंकि इसमें बहुत ही कम रेडिएशन का इस्तेमाल किया जाता है। 

    ऑस्टियोपोरोसिस के कारण

    दरअसल, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्या के कारणों में निम्नलिखित कारक शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

    1. शरीर में कैल्शियम या फिर विटामिन डी की कमी होना। 

    2. शारीरिक रूप से इन -एक्टिव लाइफस्टाइल होना। 

    3. कमजोर हड्डियां वजन और दबाव का उचित भार न उठा पाना। 

    4. जोड़ों में सूजन, अकड़न और असहजता की स्थिति बनना। 

    5. ऑस्टियोपोरोसिस से आर्थराइटिस जैसी समस्या होने पर जोड़ों में दर्द का जोखिम बढ़ना। 

    निष्कर्ष: पहले के समय में एक उम्र के बाद लोगों को हड्डियों में दर्द और कमजोर होने की शिकायत होती थी, पर गलत खानपान, तनाव में रहने, सेहत का अच्छे से ध्यान न रखने, स्क्रीन के सामने काफी समय तक बैठे रहने, नींद पूरी न करने और जीवनशैली की गलत आदतों को अपनाने के कारण आज ज्यादातर 25 की उम्र के बाद ही युवाओं को हाथ- पैरों और शरीर की अन्य हड्डियों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा शरीर में कैल्शियम और मिनरल्स की कमी होने के कारण ज्यादातर हड्डियां कमजोर होकर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी का रूप धारण कर लेती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस एक साइलेंट डिजीज है, जिसमें हड्डियां इतनी ज्यादा कमजोर हो जाती हैं, कि मामूली चोट लगने पर ही हड्डियां टूट जाती है। इसमें, जब तक हड्डी टूट न जाए, तब तक समस्या का अच्छे तरीके से पता नहीं चलता है और लक्षण भी साफ़ नज़र नहीं आते हैं। इस समस्या की पहचान करने के लिए बोन डेंसिटी टेस्ट आवश्यक होता है, क्योंकि इससे समस्या का तुरंत पता चल जाता है। बोन डेंसिटी टेस्ट के नतीजे T-स्कोर के रूप में मिलते हैं। इसके अलावा, हमेशा के लिए हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए रोजाना शारीरिक व्यायाम करना आवश्यक होता है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने और हड्डियों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही कल्याण हॉस्पिटल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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