कमर दर्द एक भयानक दर्द है इससे कैसे छुटकारा पाया जाए ?

कमर दर्द एक भयानक दर्द है इससे कैसे छुटकारा पाया जाए ?

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    Muscle pain relief and natural remedies for sore muscles at Kalyan Hospital.

    आज के समय में इतना काम होता के अपने शरीर पर ध्यान ही नहीं दिया जाता। हर दिन पीठ का दर्द होना कोई सामान्य बात नहीं है, पीठ दर्द को चिकित्सा पेशेवरों द्वारा कई तरीकों से वर्गीकृत किया गया है। आप अपने पीठ दर्द का वर्णन उसके स्थान के आधार पर कर सकते हैं: ऊपरी, मध्य या निचली पीठ का दर्द जो बाईं ओर, केंद्र या दाईं ओर होता है। पीठ दर्द की शुरुआत मांसपेशियों के दर्द से लेकर जैसे गोली लगी हो वैसे दर्द तक, जलन जैसे या छुरा घोंपने जैसी अनुभूति अनुभव करने जैसे होती है। इसके साथ दर्द लात में भी चला जाता है जिससे झुकने, मुड़ने, कुछ उठाने, ज़्यादा देर खड़ने या तुरने में दिकत भी शुरू हो जाती है। 

    रीढ़ की हड्डी, जिसे बैकबोन या स्पाइनल कॉलम भी कहा जाता है, शरीर के सबसे मजबूत हिस्सों में से एक है और यह हमें काफी लचीलापन और ताकत प्रदान करती है।यह 24 हड्डियों से बनी है, जिन्हें कशेरुक कहा जाता है, एक दूसरे के ऊपर बैठी होती है। इन हड्डियों के बीच में डिस्क होती है और इनके चारों ओर सहारे के लिए बहुत सारे मजबूत स्नायुबंधन और मांसपेशियां होती हैं। पीठ के निचले भाग में टेलबोन में भी हड्डियां होती हैं, जो आपस में जुड़ी होती हैं और बीच में कोई डिस्क नहीं होती है। मांसपेशियों में दर्द कसरत के बाद होने वाले दर्द जैसा महसूस होगा, जबकि डिस्क दर्द दुर्बल करने वाला और झुनझुनी जैसा महसूस होगा। 

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    सामान्य पीठ का दर्द होने के कारण:

    • खराब मुद्रा: घर या ऑफिस में काम करते समय, काम पर इतना ध्यान लग जाता है के आप अपना बैठना का ढंग ही भूल जाते है और कुछ समय के बाद उठकर अपने शरीर को खींचना भी भूल जाते है। मांसपेशियों में थकान और तनाव जो अंततः खराब मुद्रा का कारण बनता है। खराब मुद्रा की जटिलताओं में पीठ दर्द, रीढ़ की हड्डी में शिथिलता, जोड़ों का खराब होना, गोल कंधे और पेट का फूलना शामिल हैं। 
    • कम कसरत जिसके परिणामस्वरूप रीढ़ की हड्डी में अकड़न और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। बिलकुल भी नहीं या ज्यादा कसरत हृदय रोग का जोखिम कारक बन सकते है।   
    • मांसपेशियों के खिंचाव या मोच आमतौर पर पीठ के निचले हिस्से और जांघ के पीछे की मांसपेशियों (हैमस्ट्रिंग) में होता है। 
    • अधिक शरीर का वजन पीठ पर अतिरिक्त दबाव डालता है। 
    • अनुचित उठान, कुछ भार उठाते समय लातों पर वजन न डालकर पीठ का प्रयोग करके भी दर्द की संभावना हो सकती है।  
    • मनोवैज्ञानिक स्थितियों अवसाद और चिंता से ग्रस्त लोगों में पीठ दर्द का खतरा अधिक होता है। तनाव से मांसपेशियों में तनाव हो सकता है, जो पीठ दर्द में योगदान दे सकता है।
    • धूम्रपान करने वालों में पीठ दर्द की दर बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि धूम्रपान के कारण खांसी होती है, जिससे हर्नियेटेड डिस्क हो सकती है। धूम्रपान से रीढ़ की हड्डी में रक्त का प्रवाह भी कम हो सकता है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है।
    • उम्र पीठ दर्द आम तोर पर उम्र पर भी निर्भर करता है, जैसे उम्र बढ़ती है वैसे ही शरीर में कैल्शियम कम होने लगता है जो 30 या 40 के करीब शुरू हो जाता है। पीठ दर्द के इलाज के लिए गर्म या ठंडा सेक लगाना, एक्यूपंक्चर और दवाएं शामिल हैं। 
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    पीठ के स्वस्थ रखने के लिए क्या करें:

    • पीठ को तानें और मजबूत करें
    • रीढ़ की हड्डी में दर्द के प्रबंधन और नियंत्रण में दीर्घकालिक सफलता की कुंजी।
    • स्वस्थ वजन बनाए रखें
    • अत्यधिक वजन रीढ़ की हड्डी पर अनावश्यक शारीरिक तनाव डाल सकता है साथ में बीमारियों या शारीरिक स्थितियों का कारण बन सकता है जो रीढ़ की हड्डी को और कमजोर कर सकता है। 
    • धूम्रपान से दूर रहे 
    • सूजन पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों को कम करें या खत्म करें 
    • भारी वजन मत उठाना 
    • आपका डॉक्टर आपको आगे की जांच के लिए किसी आर्थोपेडिक सर्जन, या किसी फ़िज़ियाट्रिस्ट, दर्द प्रबंधन में विशेषज्ञता वाले डॉक्टर के पास भेज सकता है।
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